Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026 : सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। साल भर में चार बार आने वाली नवरात्रि में से सिर्फ दो ही गृहस्थों के लिए होती है। बाकी दो गुप्त नवरात्रि होती है, जिसमें साधक उपासना करते हैं। गृहस्थों के लिए चैत्र और शारदीय नवरात्रि बेहद ही मायने रखती है। इस दौरान 9 दिन तक मां दुर्गा के सारे नौ स्वरूपों को पूजा जाता है। हर एक दिन उनके अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है। चैत्र माह चल रहा है और 19 मार्च से नवरात्रि शुरू होने जा रही है। चैत्र नवरात्रि में घट यानी कलश की स्थापना की जाती है। शिवधाम मंदिर वैढ़न के महाप्रबंधक ज्योतिषविद डॉ एनपी मिश्र के अनुसार चैत्र नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य शक्ति की आराधना और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि की कामना करना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान देवी की पूजा से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इस नवरात्रि पर मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आ रही हैं। चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा।
चैत्र नवरात्रि के दिन घर की साफ सफाई कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद कलश स्थापना होती है, जिसमें मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश रखा जाता है और उस पर आम के पत्ते व नारियल स्थापित किया जाता है। फिर श्रद्धालु संकल्प लेकर व्रत और पूजा आरंभ करते हैं। नवरात्रि के नौ दिन प्रतिदिन दीपक जलाकर, धूप-अगरबत्ती करके, फूल, फल व नैवेद्य अर्पित कर मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसके अलावा व्रती व श्रद्धालुओं द्वारा दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ किया जाता है।
चैत्र नवरात्र के दिन घटस्थापना का सबसे पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगा और समापन सुबह 7 बजकर 43 मिनट पर होगा। दूसरा अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जिसका समय दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। तीसरा गोधूलि मुहूर्त रहेगा, जिसका समय शाम 6 बजकर 35 मिनट से लेकर 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
डॉ एनपी मिश्र के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती हैए जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। जिसमें 19 मार्च को मां शैलपुत्री, 20 को मां ब्रह्मचारिणी, 21 शनिवार को मां चंद्रघंटा, 22 को मां कूष्मांडा, 23 को मां स्कंद माता, 24 को मां कात्यायनी, 25 को मां कालरात्रि, 26 को अष्टमी तिथि पर मां महागौरी और 27 को रामनवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना होगी।
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