टेक्नोलॉजी

Robot Hub Noida : युवा इंजीनियरों की ताकत और हाईटेक फैक्ट्री के दम पर भारत रोबोट निर्माण में बना रहा नई पहचान,नोएडा में हर साल तैयार होंगे 1 लाख रोबोट

Published on:

Robot Hub Noida

Robot Hub Noida : नोएडा अब तेजी से भारत का सबसे बड़ा रोबोट निर्माण केंद्र बनता जा रहा है। दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर बसे इस इंडस्ट्रियल क्षेत्र में एक ऐसी अत्याधुनिक फैक्ट्री मौजूद है, जहां इंसानों से ज्यादा रोबोट काम करते नजर आते हैं। यहां छोटे से लेकर बड़े तक, हर तरह के रोबोट अलग-अलग कामों में लगे हुए हैं और पूरी व्यवस्था बेहद शांत और व्यवस्थित ढंग से चलती है।

700 से ज्यादा युवा इंजीनियर संभाल रहे जिम्मेदारी

इस रोबोट हब की सबसे खास बात यह है कि यहां करीब 740 इंजीनियर काम कर रहे हैं, जिनकी औसत उम्र सिर्फ 27 साल है। यही युवा दिमाग भारत को रोबोटिक्स के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। फैक्ट्री में मौजूद रोबोट्स सेंसर से लैस हैं, जो उन्हें इंसानों या किसी भी वस्तु से टकराने से बचाते हैं। जरूरत पड़ने पर ये खुद ही रास्ता बदल लेते हैं या रुक जाते हैं।

दो बड़ी फैक्ट्री, 1 लाख रोबोट बनाने की क्षमता

इस प्रोजेक्ट को संचालित करने वाली Addverb Technologies की दो प्रमुख यूनिट हैं—

  • बॉट वैली: 2.5 एकड़ में फैला रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर
  • बॉट वर्क्स: 15 एकड़ में बनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

बॉट वर्क्स की सालाना क्षमता 1 लाख रोबोट बनाने की है, हालांकि फिलहाल घरेलू मांग कम होने के कारण 3 से 6 हजार रोबोट ही बनाए जा रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे मांग बढ़ेगी, यह फैक्ट्री दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रोबोट निर्माण यूनिट बन सकती है।

स्वदेशी तकनीक और सोलर पावर से लैस

यहां बनने वाले ज्यादातर रोबोट्स के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पूरी तरह स्वदेशी हैं। फैक्ट्री में हाई लेवल ऑटोमेशन का इस्तेमाल किया जाता है और बिजली कटने की स्थिति में पूरा सिस्टम सोलर एनर्जी पर शिफ्ट हो जाता है। छोटे-से-छोटे काम—जैसे पुर्जों को उठाना, ढोना या असेंबल करना—सब रोबोट्स ही करते हैं।

ह्यूमनॉइड रोबोट पर खास फोकस

कंपनी इस समय ह्यूमनॉइड (इंसानों जैसे दिखने और काम करने वाले) रोबोट बनाने पर खास ध्यान दे रही है। इन रोबोट्स को फिजिकल एआई के जरिए ट्रेन किया जा रहा है, जिससे ये भविष्य में इंसानों की तरह व्यवहार कर सकेंगे। आने वाले समय में ये रोबोट बाजार में भी नजर आएंगे और कई क्षेत्रों में काम करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ती मांग

इस रोबोट हब को अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट से भी बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे साफ है कि भारत अब ग्लोबल रोबोटिक्स मार्केट में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

यहां बन रहे हैं कई एडवांस रोबोट

  • व्हील्ड ह्यूमनॉइड रोबोट (एलिक्सिस W): फैक्ट्रियों में भारी और खतरनाक काम के लिए
  • डॉग रोबोट ट्रैकर: सुरक्षा, तेल खदानों और रक्षा क्षेत्र में गश्त के लिए
  • एडवांस्ड ह्यूमनॉइड रोबोट: विजन, ऑडियो और टच डेटा प्रोसेस करने में सक्षम

कंपनी का लक्ष्य इन रोबोट्स को भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों में भी इस्तेमाल करना है, जिससे भारत तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सके। नोएडा का यह रोबोट हब न सिर्फ देश के औद्योगिक विकास का प्रतीक है, बल्कि यह भारत के टेक्नोलॉजी फ्यूचर की भी झलक दिखाता है। आने वाले समय में जब रोबोट्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनेंगे, तो इसकी नींव इसी तरह के इनोवेशन हब में तैयार हो रही है।

MP News: पुलिस से भागती कार ने जन्मदिन से लौट रहे परिवार को रौंदा, 5 की दर्दनाक मौत

Singrauli News: हीरो कप फुटबॉल टूर्नामेंट में तीसरे दिन खड़िया, गोरबी व विंध्यनगर की टीमें जीतीं

निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति Harish Rana का हुआ अंतिम संस्कार

UP News: सिलेंडर ब्लास्टिंग से मकान ढहा, मलबे में दबकर भाई-बहन की मौत