Singrauli News: गर्मी का मौसम शुरू होते ही वन महकमा वन्य प्राणियों की सुरक्ष को लेकर सक्रिय हो गया है। जगह-जगह पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने, वनों में मानव दख्खल को कम करने के साथ ही शिकारियों से वन्य प्राणियों के बचाव के लिए गोपनीयता बरतने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इस मौसम में भालू जैसे वन्य प्राणियों की मौजूदगी मानवीय उपयोग के स्थलों, महुआ फूल गिरने वाले स्थलों आदि में आसानी से पायी जाती है, जिससे टोह लेकर शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं और आसानी से किसी स्थान पर पहुंचने वाले वन्य प्राणियों को सुरक्षित तरीके से निशाना बनाने का कार्य करते हैं। वन अमले ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही वन्य प्राणियों की पहली प्राथमिकता
होती है कि उन्हें पीने का पानी सहज उपलब्ध होना चाहिए बल्कि सुनसान स्थानों पर ही उनकी मौजूदगी रहती है। भालू, सांभर, खरगोश और वे सभी जीव जो कि किसी मांसाहारी जीव के द्वारा अपना आहार बना लिए जाने का प्रयास किया जाता है। ऐसी स्थिति में उनके लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखने, पारिस्थितिकी तंत्र बहाल रखने का प्रयास किया जाता है। कई वन्य प्राणी जिनमें खरहा, सांभर, हिरण और अन्य शाकाहारी जीव-जंतु भी आते हैं।
इन्हें बचाए रखने के लिए रातदिन निगरानी करनी होती है। यह आवश्यक नहीं कि जीवों को सिर्फ पानी की ही जरूरत होगी, तभी उसका शिकार होगा। कई बार शिकारी रात में अपने शिकार की तलाश में आता है और पानी पीने के स्थान के आसपास एम्बुश लगाता है। ऐसी स्थिति में वन महकमे को और अधिक सजग रहने की जरूरत होती है।
कई रेंजों में बनाए गये है स्टॉप डैम
वन महकमे ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक रेज में स्टॉप डैम, चेक डैम, प्राकृतिक वर्षा के जल को संचय करने के उपाय किए जाते हैं। कई रेंज में गत वर्ष बनाए गये स्टॉप डैम अभी भी प्रभावी बने हुए हैं, उनमें पानी भरा हुआ है। कई ऐसे स्थान भी हैं, जहां पर प्राकृतिक रूप से वर्ष भर पानी बनाए रखने के उपाय किए गये हैं। बताया गया कि जंगल के अंदर कई ऐसे स्थान भी हैं, जहां पर जीव-जंतु पानी पीने के लिए आते हैं, लेकिन उनकी फोटो, वीडियो या किसी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है। ऐसी जानकारियों के सार्वजनिक होने से शिकारी सक्रिय हो जाते हैं।
झाड़ियों को काटकर आग से सुरक्षित किया
वन्य प्राणियों को आग से भी सुरक्षा करनी होती है। उनके बचाव के लिए वन अमले ने बताया कि अभी तक किसी प्रकार की अवांछनीय आग की स्थितियां नहीं मिली हैं। स्थानीय लोग महुआ बीनने के लिए सूखे पत्तों पर आग लगा देते हैं, जिसकी आग से वनों की सुरक्षा करना जरूरी होती है। इसके साथ ही वन्य प्राणियों की सुरक्षा भी जरूरी होती है।
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