Petrol Diesel Prices Today : अमेरिका-ईरान टकराव के बीच तेल डीजल के दाम 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए। इससे जबलपुर में एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 110.74 रु. तो डीजल की 95.93 रु. हो गई। बीते शुक्रवार को भी दोनों पेट्रो उत्पादों के दाम 3-3 रु. प्रति लीटर बढ़े थे। फरवरी में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल के दाम 50% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। इसलिए ताजा कीमत बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 10 तो डीजल पर 13 रु. प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। इसकी बड़ी वजह होर्मुज जलमार्ग का बंद होना है। पेट्रोलियम इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि दाम इस तरह बढ़ाए गए हैं ताकि तेल कंपनियों पर दबाव कुछ कम हो, लेकिन बड़ा झटका न लगे।
पेट्रोल-डीजल अभी और कितने महंगे हो सकते हैं?
बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि तेल कंपनियों का नुकसान 50 प्रतिशत तक घटाने के लिए कम से 10 रुपए तक दाम बढ़ाने जरूरी हैं। यानी आगे 5-6 रुपए बढ़ोतरी संभव है। महंगे तेल का जेब पर असर? डीजल सबसे ज्यादा (40%) इस्तेमाल होने वाला ईंधन है। बर्कलेज की रिपोर्ट बताती है कि डीजल महंगा यानी माल ढुलाई महंगी। जून से खुदरा महंगाई दर बढ़ना तय है। इससे फल-सब्जियां 15 प्रतिशत महंगे हो सकतेहैं। पैकेट बंद दूध, एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के दाम भी बढ़ाने की तैयारी है।
यहां तेल कीमतों में बढ़ोतरी विकसित देशों से कितनी कम है? विकसित देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन आदि में ईंधन की दरें सीधे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल से जुड़ी हैं। वहां 28 फरवरी के बाद से अब तक पेट्रोल-डीजल 35% से 45% तक महंगे हो चुके हैं। भारत में अभी दाम 4% ही बढ़े हैं।
तेल कंपनियों को अभी कितना नुकसान हो रहा?
दो बार में 4 रु. बढ़ने से तेल कंपनियों का घाटा 25% कम हुआ है। उन्हें अभी भी रोज 750 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
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